लालकुआं: 41 साल बाद बदली सेंचुरी मिल की पहचान, ITC ने संभाली कमान; 8 हजार कर्मचारियों के लिए नए दौर की शुरुआत

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लालकुआं। उत्तराखंड के औद्योगिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज हो गया है। चार दशक से अधिक समय तक आदित्य बिड़ला समूह की पहचान रही सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल अब आधिकारिक रूप से आईटीसी लिमिटेड (ITC Limited) का हिस्सा बन गई है। 1 अगस्त 2026 से प्रभावी इस अधिग्रहण के साथ न केवल मिल का स्वामित्व बदला है, बल्कि क्षेत्र की सबसे बड़ी औद्योगिक इकाइयों में से एक ने विकास और विस्तार के नए अध्याय में भी प्रवेश कर लिया है।

आईटीसी लिमिटेड द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार यह अधिग्रहण बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट के तहत स्लंप सेल (Slump Sale) आधार पर पूरा किया गया है। इसके साथ ही सेंचुरी पल्प एंड पेपर से जुड़े सभी संयंत्र, परिसंपत्तियां, देनदारियां, अनुबंध, लाइसेंस तथा कर्मचारी अब आईटीसी लिमिटेड के अधीन आ गए हैं।

कंपनी सचिव एवं कार्यकारी उपाध्यक्ष आर. के. सिंघी ने बताया कि 31 मार्च 2025 और 17 दिसंबर 2025 को जारी पूर्व सूचनाओं के क्रम में यह अधिग्रहण अब औपचारिक रूप से पूर्ण हो चुका है। कंपनी का कहना है कि इससे पल्प एवं पेपर कारोबार में उसकी उत्पादन क्षमता, परिचालन दक्षता और बाजार में मौजूदगी को नई मजबूती मिलेगी तथा यह उसकी दीर्घकालिक विस्तार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उधर, लालकुआं में भी स्वामित्व परिवर्तन की सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। मिल के अधिकारियों, नियमित कर्मचारियों, स्टाफ तथा ठेका कर्मियों से स्थानांतरण संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। नए प्रबंधन ने कर्मचारियों के स्वागत के लिए भोजनालय में विशेष भोज का आयोजन किया, जहां उन्हें नई जिम्मेदारियों के साथ कार्य प्रारंभ करने पर शुभकामनाएं और पारितोषिक भी दिए गए।

वर्ष 1984 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वर्गीय पंडित नारायण दत्त तिवारी के विशेष प्रयासों से स्थापित यह मिल पिछले 41 वर्षों से लालकुआं की औद्योगिक पहचान, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार रही है। देश के कागज उद्योग में इस इकाई ने अपनी अलग पहचान बनाई और हजारों परिवारों की आजीविका का केंद्र बनी रही।

वर्तमान में इस इकाई में लगभग 8,000 अधिकारी, कर्मचारी और ठेका कर्मी कार्यरत हैं। लालकुआं, बिंदुखत्ता, घोड़ानाला समेत आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर रही है। ऐसे में आईटीसी लिमिटेड का यह अधिग्रहण केवल स्वामित्व परिवर्तन नहीं, बल्कि क्षेत्र के औद्योगिक विकास और भविष्य की संभावनाओं के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।