उत्तराखंड: जंगल की आग को लेकर सीएम धामी ने की हाई लेवल मीटिंग, अधिकारियों को दिए ये सख्त आदेश….

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को राज्य के जंगलों में लगी आग की स्थिति पर चर्चा करने के लिए अधिकारियों के साथ हाई लेवल मीटिंग की। धामी ने कुमाऊं डिवीजन के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए क्षेत्र में जंगल की आग को रोकने के प्रयासों की समीक्षा की और आग को रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को हर समय अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं, साथ ही वन विभाग के सभी अधिकारियों की छुट्टियों रद्द कर करते हुए आग बुझाने के प्रयासों में लगे अधिकारियों को बैठक के लिए देहरादून न बुलाने के निर्देश भी दिए हैं।

मीटिंग में सीएम धामी ने कहा कि जंगलों की आग को रोकने के लिए प्रयास जारी रखते हुए वन विभाग के अलावा अन्य विभाग भी अलर्ट मोड पर रहें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जंगल में आग की घटनाओं को रोकने के लिए सूचना तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए साथ ही क्विक रिस्पॉन्स टीम को कम से कम समय में कार्रवाई करनी चाहिए। अपनी बात आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि जंगल की आग की प्रभावी रोकथाम के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों का सहयोग लिया जाना चाहिए।

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शनिवार को हुई बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया, ‘वनआग्नि को हम लोगों ने चुनौती के रूप में लिया है। आग को रोकने के लिए जो भी जरूरी इंतजाम हैं उन्हें करने के लिए कहा है। सभी प्रमुख अधिकारियों के साथ इस पर चर्चा की है, जिला अधिकारियों और जिले के अलग-अलग विभाग के अधिकारियों को सबको समन्वय के साथ काम करने के लिए और जो फायर स्टेशन हैं, उन्हें एक्टिव करने के लिए कहा है। स्थानीय स्तर पर अलग-अलग संगठनों और जंगलों के करीब रहने वाले लोगों की सबकी मदद लेने के लिए भी कहा है। वन विभाग में इस समय सभी की छुट्टियां रद्द कर दी गई है। यह हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण समय है, यहां राज्य में चार धाम यात्रा शुरू हो रही है, पर्यटकों का सीजन भी शुरू हो गया है। तो ऐसे समय में आग ज्यादा लगने से प्रदूषण भी फैलता है और हमारे राज्य का पर्यावरण भी खराब होता है। साथ ही पेयजल और जाम की व्यवस्था भी ठीक करने के लिए कहा है।’

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सीएम धामी ने कहा कि जंगल में लगी आग से निपटने में सेना भी स्थानीय प्रशासन की सहायता कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि जो भी अराजक तत्व जंगलों में आग लगाते हुए पकड़े जाएंगे उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस बैठक में विधायक सरिता आर्य, कमिश्नर कुमाऊं दीपक रावत, जिलाधिकारी वंदना सहित वन एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

इससे पहले शनिवार को दिन में मुख्यमंत्री ने जंगल की आग से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से जंगल में आग लगने की घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा रहा है। बता दें कि पिछले 24 घंटों में, उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों से जंगल में आग लगने की कई घटनाएं सामने आईं हैं, जिससे कई हेक्टेयर वन भूमि नष्ट हो गई है।

जंगल में लगातार फैल रही आग को बुझाने के लिए भारतीय सेना की मदद भी ली जा रही है। इस आग से कुमाऊं क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। सीएम धामी ने शनिवार को कहा कि भारतीय सेना और वायु सेना के हेलीकॉप्टर राज्य में जंगल की आग को नियंत्रित करने में सहायता कर रहे हैं। आग लगे हुए 36 घंटों से अधिक समय हो गया है, ऐसे में कई हेक्टेयर हरियाली को जलाने के बाद आग नैनीताल तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आग एक बड़ी चुनौती है और स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक संसाधन जुटाए जा रहे हैं।

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उधर आग पर काबू पाने के लिए भारतीय वायु सेना (IAF) ने MI-17 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। जो कि ऊंची उठती लपटों को बुझाने के लिए नैनीताल झील से पानी खींच रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप झील पर नौकायन गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। आग ने पहले ही कई हेक्टेयर जंगली इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है, और आग की तेज लपटों पर अभी तक पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। उत्तराखंड में जंगल की आग फरवरी के मध्य में शुरू होती है जब पेड़ सूखे पत्ते गिरा देते हैं और तापमान में वृद्धि के कारण मिट्टी में नमी खो जाती है और यह जून के मध्य तक जारी रहती है।