बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम विवाद: 11,703 परिवारों के दावे पर उठे सवाल, वनाधिकार समिति ने दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की
लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सामूहिक वनाधिकार दावे की स्थिति को लेकर विवाद गहरा गया है। भाकपा माले की एक बैठक में बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने की प्रक्रिया और सामूहिक दावे पर आपत्तियों को लेकर दिए गए बयानों पर वनाधिकार समिति बिंदुखत्ता ने आपत्ति जताई है। समिति के सचिव भुवन भट्ट ने इन बयानों का खंडन करते हुए संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।
भुवन भट्ट ने कहा कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर वनाधिकार संगठन तहसील लालकुआं में और इंडिया गठबंधन से जुड़े लोग शहीद स्मारक पर आंदोलन कर रहे हैं। इसी बीच भाकपा माले की बैठक में कथित तौर पर यह बयान दिया गया कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा वनाधिकार अधिनियम के बजाय निर्वनीकरण की प्रक्रिया से मिलेगा और सामूहिक दावा आपत्तियों के साथ वापस आ गया है। वनाधिकार समिति ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए संबंधित पक्षों से प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है।
19 जून 2024 को सामूहिक दावा स्वीकृत होने का दावा
वनाधिकार समिति के सचिव भुवन भट्ट के अनुसार, बिंदुखत्ता का सामूहिक दावा जिला स्तरीय समिति (DLC) द्वारा 19 जून 2024 को स्वीकृत किया जा चुका है। उनका कहना है कि अब राजस्व ग्राम घोषित करने संबंधी अधिसूचना जारी होना शासन स्तर पर लंबित है।
भट्ट ने बताया कि वर्ष 2024 और 2025 के दौरान दावे पर तीन बार आपत्तियां आई थीं। समिति का दावा है कि इन आपत्तियों का कानूनी प्रावधानों के तहत जवाब दिया गया और उनका निराकरण किया जा चुका है। इसी आधार पर उन्होंने सामूहिक दावा वापस आने संबंधी बयान पर सवाल उठाए और कहा कि संबंधित पक्षों को अपने दावे के समर्थन में अभिलेख सार्वजनिक करने चाहिए।
11,703 दावेदार परिवारों से माफी की मांग
भुवन भट्ट ने इंडिया गठबंधन से मांग की कि यदि सामूहिक दावा वापस आने संबंधी बयान दिया गया है, तो उसके समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो बिंदुखत्ता के 11,703 दावेदार परिवारों से माफी मांगी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजस्व ग्राम की मांग से बड़ी संख्या में परिवार जुड़े हुए हैं, इसलिए इस विषय पर बयान देते समय तथ्यों और आधिकारिक अभिलेखों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
वनाधिकार अधिनियम के प्रावधानों का दिया हवाला
भुवन भट्ट ने वनाधिकार अधिनियम, 2006 का हवाला देते हुए कहा कि अन्य परंपरागत वन निवासी (OTFD) के लिए 75 वर्ष या तीन पीढ़ियों से एक ही स्थान पर निवास करने की शर्त को सही संदर्भ में समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सामूहिक दावे की स्थिति में प्रत्येक दावेदार से अलग-अलग व्यक्तिगत साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनिवार्यता नहीं है।
समिति सचिव ने इस मामले में कांग्रेस नेताओं से भी अपना पक्ष स्पष्ट करने की अपील की। उनका कहना है कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से रखे जा रहे तथ्यों का दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट होना जरूरी है।
मीडिया से तथ्यों की पुष्टि करने की अपील
भुवन भट्ट ने मीडिया और सोशल मीडिया संपादकों से अनुरोध किया कि बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम से जुड़े संवेदनशील विषय पर समाचार प्रकाशित करने से पहले संबंधित तथ्यों और सरकारी अभिलेखों की पुष्टि अवश्य करें। उन्होंने कहा कि दावे की वर्तमान स्थिति की जानकारी शासन-प्रशासन से प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने स्थानीय लोगों से भी इस मुद्दे पर एकजुट रहने और बाहरी व्यक्तियों द्वारा दिए जा रहे बयानों के संबंध में तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रखने की अपील की।
वनाधिकार समिति का कहना है कि बिंदुखत्ता के सामूहिक दावे की स्थिति और राजस्व ग्राम की अधिसूचना को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित सरकारी अभिलेख महत्वपूर्ण हैं। दावे की स्वीकृति, आपत्तियों के निस्तारण और अधिसूचना की मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभाग के दस्तावेजों से किया जाना आवश्यक है।

संपादक – उत्तराखण्ड उदय
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