लालकुआं में भूसे का संकट गहराया, जानवरों पर मंडराया भूख का खतरा; पशुपालकों ने उठाए बड़े सवाल
लालकुआं। क्षेत्र में इन दिनों भूसे की भारी किल्लत ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई गांवों और आसपास के इलाकों में पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है।
पशुपालकों का आरोप है कि बड़ी मात्रा में भूसा फैक्ट्रियों में भेजे जाने के कारण स्थानीय स्तर पर पशुओं के लिए चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे जानवर भूख के कगार पर पहुंच गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां आसानी से भूसा मिल जाता था, वहीं अब बाजार में इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। कई पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए कई गुना महंगा भूसा खरीदना पड़ रहा है। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है।
पशुपालकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और शासन की अनदेखी के चलते हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। उनका कहना है कि पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाला भूसा बड़ी संख्या में फैक्ट्रियों में खपाया जा रहा है, जिससे पशुपालकों के सामने संकट गहराता जा रहा है।
ग्रामीणों और पशुपालकों ने सरकार से मांग की है कि पशुओं के चारे के रूप में उपयोग होने वाले भूसे को फैक्ट्रियों में भेजने पर नियंत्रण लगाया जाए। साथ ही स्थानीय पशुपालकों के लिए उचित दरों पर भूसे की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले दिनों में पशुपालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। लगातार बढ़ती महंगाई और चारे की कमी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।


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