“काश संरक्षण न मिला होता…”: हल्द्वानी गोलीकांड पर उठे सियासी सवाल, दो माह पहले भाजपा विधायक के धरने की याद ने झकझोरा शहर
हल्द्वानी। शहर में दिनदहाड़े हुए सनसनीखेज गोलीकांड के बाद अब मामला सिर्फ आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि काश दो माह पहले भाजपा विधायक बंशीधर भगत ने भाजपा पार्षद और संगठन से जुड़े अमित बिष्ट उर्फ चिंटू को संरक्षण न दिया होता, तो शायद आज युवक नितिन जिंदा होता।
दिनदहाड़े हुई फायरिंग में भाजपा पार्षद अमित बिष्ट उर्फ चिंटू द्वारा जज फार्म निवासी युवक नितिन को गोली मारने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे हल्द्वानी में आक्रोश और दहशत का माहौल है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पार्षद को गिरफ्तार कर लिया है और उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर भी जब्त कर ली गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद 6 सितंबर को हुआ वह विवाद फिर चर्चा में आ गया है, जब अमित बिष्ट से जुड़े एक मारपीट के मामले में भाजपा विधायक बंशीधर भगत खुद कोतवाली पहुंचे थे और धरने पर बैठ गए थे। उस वक्त विधायक द्वारा खुले तौर पर समर्थन दिए जाने को लेकर भी सवाल उठे थे, लेकिन मामला समय के साथ दब गया।
अब नितिन की मौत के बाद लोग यह सवाल कर रहे हैं कि अगर उस समय सख्त कार्रवाई होती, तो क्या आज यह खून-खराबा टल सकता था? शहर के लोगों और सोशल मीडिया पर लगातार यह बात उठ रही है कि राजनीतिक रसूख और संरक्षण ने एक युवक की जान ले ली।
घटना के बाद मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि नितिन की किसी से ऐसी दुश्मनी नहीं थी कि उसे दिनदहाड़े गोली मारी जाए। वहीं पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की गहन जांच की जा रही है और घटना के पीछे के कारणों की पड़ताल की जा रही है।
इस वारदात ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीतिक संरक्षण अपराधियों के हौसले बढ़ा रहा है? और क्या समय रहते कार्रवाई होती तो एक निर्दोष जान बचाई जा सकती थी।


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