बड़ी खबर: उपनल कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर, न्यूनतम वेतनमान देने को तैयार सरकार, लेकिन….
नैनीताल। उत्तराखंड के हजारों उपनल कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में कहा है कि वह वर्षों से कार्यरत उपनल संविदा कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने के लिए सशर्त तैयार है। हालांकि सरकार ने इसके लिए यह शर्त रखी है कि कर्मचारी स्थायी कर्मचारियों की तरह अन्य सुविधाओं और मांगों का दावा नहीं करेंगे।
शुक्रवार को हाई कोर्ट में उपनल संविदा कर्मचारियों को नियमित न किए जाने, न्यूनतम वेतनमान न दिए जाने और वेतन से जीएसटी कटौती के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि उपनल कर्मचारियों के स्थान पर नई नियुक्तियां करने संबंधी प्रस्ताव वापस ले लिया गया है। वहीं उपनल संविदा कर्मचारी संघ की ओर से अदालत में कहा गया कि वर्ष 2013 की नियमावली के अनुसार 10 वर्ष से अधिक सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को नियमित किया जाना चाहिए।
संघ की ओर से यह भी दलील दी गई कि हाई कोर्ट की खंडपीठ पहले ही उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर आदेश दे चुकी है, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया है। कर्मचारियों ने कहा कि इस मामले को कैबिनेट में भेजने की भी आवश्यकता नहीं है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सरकार से कहा कि पहले उपनल कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने की दिशा में कदम उठाए जाएं। मामले में अगली सुनवाई 9 जून को होगी।
यह मामला प्रदेश के हजारों उपनल कर्मचारियों से जुड़ा है, जो लंबे समय से नियमितीकरण और समान कार्य के बदले समान वेतन की मांग कर रहे हैं। संभावित फैसले पर अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं।


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