काल के जाल में समाई कई जानें: उत्तराखंड के लिए खून-खराबे से भरा रहा साल 2025, सड़कों पर नहीं थमा मौत का तांडव

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उत्तराखंड के लिए साल 2025 सड़क हादसों के लिहाज से बेहद दर्दनाक और डरावना साबित हुआ। पहाड़, मैदान, राष्ट्रीय राजमार्ग, चारधाम यात्रा मार्ग—शायद ही कोई इलाका ऐसा रहा हो जहां हादसों ने लोगों की जान न ली हो। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2025 तक राज्य में 1,369 सड़क हादसों में 932 लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए। साल के आखिरी महीनों तक यह आंकड़ा और बढ़ता गया। हर हादसे ने किसी न किसी परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।

साल की शुरुआत ही हादसों से हुई। 12 जनवरी 2025 को पौड़ी जिले के सत्यखाल मोटर मार्ग पर यात्रियों से भरी बस गहरी खाई में जा गिरी। बस में 28 लोग सवार थे, जिनमें 6 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 22 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। रेस्क्यू ऑपरेशन घंटों चला, लेकिन कई परिवारों के लिए यह दिन कभी न भूलने वाला बन गया।

इसके बाद टिहरी गढ़वाल जिले के नरेंद्र नगर क्षेत्र में श्रद्धालुओं से भरी एक बस हादसे का शिकार हो गई। कुंजापुरी मंदिर से लौट रही यह बस ब्रेक फेल होने के कारण खाई में गिर गई। इस हादसे में गुजरात और उत्तर प्रदेश से आए 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 13 अन्य घायल हो गए। चारधाम और धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले रास्तों की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए।

टिहरी गढ़वाल के ही देवप्रयाग क्षेत्र में एक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया। शादी समारोह में शामिल होने जा रहा एक परिवार ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर दुर्घटना का शिकार हो गया। कार अनियंत्रित होकर अलकनंदा नदी में गिर गई। इस हादसे में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत हो गई, जिनमें तीन मासूम बच्चे भी शामिल थे। पूरे इलाके में मातम पसर गया।

चारधाम यात्रा के दौरान 26 जून 2025 को रुद्रप्रयाग जिले में बड़ा हादसा हुआ। यात्रियों से भरी एक मिनी बस अलकनंदा नदी में समा गई। बस में राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से आए श्रद्धालु सवार थे। इस दुर्घटना में 10 लोगों की मौत हो गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि एक ट्रक की टक्कर के बाद बस नदी में जा गिरी। उफनती नदी में रेस्क्यू करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।

बरसात के मौसम में हादसों का सिलसिला और तेज हो गया। पहाड़ों में भूस्खलन, फिसलन भरी सड़कें और संकरी घुमावदार राहें कई दुर्घटनाओं का कारण बनीं। कहीं कार खाई में गिरी, कहीं बाइक सवार जान गंवाते रहे, तो कहीं बसें मौत का सफर बन गईं। देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, टिहरी, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में लगातार हादसों की खबरें आती रहीं।

साल के अंत में अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र के भिकियासैंण में केएमओयू बस हादसे ने एक बार फिर पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। सड़क से फिसलकर खाई में गिरी बस में 19 यात्री सवार थे। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 यात्री घायल हुए। खाई में बिखरे शव और रोते-बिलखते परिजन इस बात की गवाही दे रहे थे कि साल 2025 जाते-जाते भी जख्म दे गया।
इन बड़े हादसों के अलावा पूरे साल छोटे-बड़े सैकड़ों सड़क हादसे होते रहे, जिनमें कई युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने अपनी जान गंवाई। ओवरस्पीड, लापरवाही, खराब सड़कें, तकनीकी खामियां और नियमों की अनदेखी लगातार मौत की वजह बनती रहीं। जागरूकता अभियान चले, चेतावनी बोर्ड लगे, लेकिन जमीनी हालात ज्यादा नहीं बदले।

साल 2025 उत्तराखंड के लिए एक कड़वी याद बनकर रह गया। सवाल अब भी वही हैं—क्या पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त हैं, क्या वाहनों की नियमित जांच हो रही है और क्या नियमों को सख्ती से लागू किया जा रहा है? अगर इन सवालों के जवाब समय रहते नहीं मिले, तो आने वाले साल भी शायद ऐसे ही कई घरों के चिराग बुझाते रहेंगे।