उत्तराखंड का रहस्यमयी मंदिर! जहां पुजारी भी नहीं कर सकते भगवान के दर्शन, आंखों पर पट्टी बांधकर होती है पूजा
उत्तराखंड को देवभूमि यूं ही नहीं कहा जाता। यहां की पावन वादियों में ऐसे अनेक मंदिर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जो अपनी अनोखी परंपराओं, रहस्यों और आस्था के कारण देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं। इन्हीं में से एक है चमोली जिले के वाण गांव में स्थित लाटू देवता मंदिर, जिसकी परंपरा आज भी लोगों को हैरान कर देती है। यह शायद देश का ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां न तो आम श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकते हैं और न ही मंदिर के पुजारी सीधे देवता का स्वरूप देख पाते हैं।

मान्यता है कि मंदिर के गर्भगृह में विराजमान लाटू देवता की दिव्य शक्ति इतनी प्रबल है कि उनके प्रत्यक्ष दर्शन करना किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। यही कारण है कि मंदिर के कपाट खुलने पर भी पुजारी आंखों और मुंह पर पट्टी बांधकर ही पूजा-अर्चना करते हैं।
साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं कपाट
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार लाटू देवता, मां नंदा देवी के धर्म भाई माने जाते हैं। मंदिर के कपाट वर्ष में केवल एक बार वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर खोले जाते हैं। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना, विष्णु सहस्रनाम और भगवती चंडिका पाठ का आयोजन किया जाता है। हजारों श्रद्धालु इस अवसर पर मंदिर पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें भी दूर से ही दर्शन करने की अनुमति होती है।
नागराज और दिव्य मणि से जुड़ी है मान्यता
लोक मान्यताओं के अनुसार मंदिर में लाटू देवता नागराज के रूप में अपनी दिव्य मणि के साथ विराजमान हैं। कहा जाता है कि उनकी मणि की दिव्य आभा को सामान्य मनुष्य सहन नहीं कर सकता। इसी कारण पुजारी आंखों पर पट्टी बांधकर मंदिर के भीतर प्रवेश करते हैं। वहीं मुंह पर पट्टी बांधने के पीछे भी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है।
देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु
यह रहस्यमयी मंदिर चमोली जिले के देवाल विकासखंड के वाण गांव में स्थित है। हर वर्ष कपाट खुलने के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर की अनूठी परंपरा और रहस्य इसे उत्तराखंड के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में शामिल करते हैं।
कैसे पहुंचे लाटू देवता मंदिर?
लाटू देवता मंदिर चमोली मुख्यालय से करीब 27 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और हरिद्वार हैं, जबकि निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है। वहां से सड़क मार्ग के जरिए वाण गांव पहुंचा जा सकता है।


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