उत्तराखंड में थमा निहंगों का विवाद! रातभर चली वार्ता के बाद सुबह 3:30 बजे बनी सहमति,….सामान्य हुए हालात

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देहरादून। उत्तराखंड के कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर पिछले कई दिनों से बना तनाव आखिरकार समाप्त हो गया है। पंजाब और हिमाचल प्रदेश से उत्तराखंड की ओर कूच कर रहे निहंग सिखों और प्रशासन के बीच पूरी रात चली मैराथन वार्ता सफल रही। शुक्रवार तड़के करीब 3:30 बजे दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद निहंग सिखों का जत्था शांतिपूर्वक वापस लौट गया। इसके साथ ही देहरादून, ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में हालात सामान्य हो गए।

दरअसल, कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारों से जुड़े एक मामले में चार निहंग सिखों की गिरफ्तारी के विरोध में निहंग जत्थे ने उत्तराखंड कूच का ऐलान किया था। इसी मांग को लेकर बड़ी संख्या में निहंग हिमाचल-उत्तराखंड सीमा स्थित कुल्हाल चेक पोस्ट पहुंचे थे। प्रारंभिक दौर की वार्ता सफल नहीं होने के बाद कुछ निहंग देहरादून की ओर रवाना हो गए, जबकि अधिकांश पांवटा साहिब लौट गए।

स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने देहरादून, प्रेमनगर, जोगीवाला और ऋषिकेश मार्ग पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई, जिससे कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस ने जोगीवाला के पास निहंग जत्थे को आगे बढ़ने से रोक दिया और बाद में उन्हें रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारे में ठहराया गया।

यहीं जिला प्रशासन, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सिख समाज के प्रतिनिधियों के बीच पूरी रात वार्ता चली। लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी और निहंग सिख शांतिपूर्वक वापस लौटने पर राजी हो गए।

वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले सिख समाज के प्रतिनिधि एवं कांग्रेस नेता अमरजीत सिंह ने कहा कि निहंग सिखों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना नहीं था, बल्कि वे अपने साथियों की रिहाई और अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि यह विवाद किसी समुदाय के बीच नहीं, बल्कि कुछ गलतफहमियों के कारण उत्पन्न हुआ था।

वहीं जिलाधिकारी आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल ने संयुक्त रूप से बताया कि पूरे घटनाक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संभाल लिया गया है। फिलहाल क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है और सुरक्षा के मद्देनजर लगाए गए अतिरिक्त प्रतिबंध भी हटा दिए गए हैं।