उत्तराखंड: शिक्षा के मंदिर में शर्मसार करने वाली घटना, छात्रा की ड्रेस पर आपत्तिजनक टिप्पणी, आयोग सख्त

ख़बर शेयर करें 👉

देहरादून। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना की अध्यक्षता में निजी विद्यालयों से जुड़े कई गंभीर मामलों की सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान आयोग ने साफ संदेश दिया कि बाल अधिकारों, शिक्षा की निरंतरता और विद्यालयों की वैधानिकता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई तय है।

कान्वेंट ऑफ जीजस एंड मैरी (सीजेएम) स्कूल से जुड़ा मामला आयोग के सामने आया, जिसमें एक छात्रा ने शिक्षक द्वारा ड्रेस पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि प्रधानाचार्य ने शिक्षक पर कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया, जिससे छात्रा मानसिक रूप से प्रभावित हुई। आयोग द्वारा नोटिस भेजे जाने के बावजूद स्कूल प्रशासन की ओर से कोई प्रतिनिधि सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए आयोग ने 17 जनवरी को बीईओ कार्यालय से संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही छात्रा की 12वीं की परीक्षा को देखते हुए उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वीडियो कॉल के माध्यम से सुनवाई में जोड़ने को कहा गया है।

लूसेंट विद्यालय के मामले में आयोग ने बिना पंजीकरण छात्रों के दाखिले को गंभीर उल्लंघन माना। उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद कुछ छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति मिली थी, लेकिन इसके बावजूद विद्यालय प्रबंधन ने शिक्षा विभाग के नोटिसों का कोई जवाब नहीं दिया और न ही सुनवाई में उपस्थित हुआ। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने लूसेंट विद्यालय की एनओसी निरस्त करने के आदेश दिए हैं।
साथ ही बीईओ को निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालय परिसर के बाहर सूचना बोर्ड लगाया जाए, ताकि अभिभावकों को सही स्थिति की जानकारी मिल सके।
ब्राइटलैंड्स विद्यालय के मामले में एक छात्र की जबरन टीसी जारी करने और शुल्क वापसी न करने की शिकायत सामने आई थी। आयोग के अनुसार, अब विद्यालय ने अपनी त्रुटि सुधार ली है और मामले का समाधान कर दिया गया है।

कैम्ब्रियन हाल स्कूल से जुड़े मामलों की सुनवाई में आयोग ने पाया कि विद्यालय बिना वैध लीज के संचालित हो रहा है और संबंधित सोसायटी का पंजीकरण भी लंबित है। आयोग ने रजिस्ट्रार सोसायटी से एनओसी प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण मांगा है और शिक्षा विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि भूमि की वैधता और पंजीकरण की जांच किए बिना एनओसी कैसे जारी की गई।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने स्पष्ट किया कि बच्चों की गरिमा, सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी संस्थानों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।