(बड़ी खबर) धामी सरकार का बड़ा प्रहार! 54 करोड़ भूमि घोटाले में आईएएस अधिकारी पर बर्खास्तगी की तलवार, 10 लोगों पर होगी एफआईआर

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देहरादून। हरिद्वार नगर निगम के बहुचर्चित 54 करोड़ रुपये के भूमि खरीद प्रकरण में उत्तराखंड सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन नगर आयुक्त एवं आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी की बर्खास्तगी की संस्तुति करने का निर्णय लिया है। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी करमेंद्र सिंह के विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) की कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। इसके अलावा तत्कालीन उपजिलाधिकारी अजयवीर सिंह के सेवा अभिलेख में परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने का निर्णय भी लिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

हरिद्वार नगर निगम द्वारा सराय क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण केंद्र के विस्तार के लिए लगभग 33 बीघा भूमि 54 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी। आरोप है कि भूमि खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। जांच में सामने आया कि भूमि का उपयोग कृषि से बदलकर व्यावसायिक श्रेणी में किया गया, जिससे उसका सर्किल रेट 6 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़कर 25 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गया। इसी आधार पर नगर निगम को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप लगे।

विजिलेंस जांच में मिली अनियमितताओं की पुष्टि

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मामले की सतर्कता जांच कराई गई। जांच में आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के माध्यम से भूमि खरीद-बिक्री कर नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।

10 लोगों के खिलाफ दर्ज होगी प्राथमिकी

राज्य सरकार ने मामले में कुल 10 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दे दी है। इनमें तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, अभियंता आनंद सिंह मिश्रा, संपत्ति लिपिक वेदपाल, मानचित्रकार दिनेश कांडपाल तथा भूमि विक्रेता सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के नाम शामिल हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग में लिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।