बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम आंदोलन में पहुंचे कैबिनेट मंत्री, 5 अक्टूबर तक सरकार को समय; अधिसूचना नहीं हुई तो फिर शुरू होगा धरना

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लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से फोन पर बातचीत के बाद ग्रामीणों को मामले के समाधान का भरोसा दिलाया।

कैड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने के मामले का समाधान चाहते हैं। उन्होंने आंदोलनकारियों से फिलहाल धरना स्थगित करने की अपील करते हुए कहा कि आगामी 10 से 15 दिनों के भीतर शासन स्तर पर वार्ता कराकर समाधान का रास्ता तलाशने का प्रयास किया जाएगा।

5 अक्टूबर तक सरकार को समय
मंत्री के आश्वासन के बाद वन अधिकार संगठन ने ग्रामीणों के साथ विचार-विमर्श किया। इसके बाद संगठन अध्यक्ष उमेश भट्ट ने सरकार को 5 अक्टूबर तक का समय देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि तय समय तक राजस्व गांव की अधिसूचना जारी नहीं हुई तो लालकुआं तहसील में दोबारा अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

उमेश भट्ट के मुताबिक, इस मांग को लेकर शासन और प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है। अब संगठन की मांग केवल आश्वासन तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्व गांव की अधिसूचना जारी किए जाने की है।

32 गांवों के 11,703 दावेदार
वन अधिकार संगठन के अनुसार बिंदुखत्ता के 32 गांवों के 11,703 दावेदारों की ओर से वनाधिकार कानून-2006 की धारा 3(1)(ज) के तहत प्रस्तुत सामुदायिक दावे को 19 जून 2024 को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने सर्वसम्मति से पारित किया था। संगठन का कहना है कि इसके बाद राजस्व गांव की अधिसूचना और बंदोबस्ती की प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया, लेकिन अंतिम अधिसूचना अब तक जारी नहीं हुई है।

संगठन के अनुसार इसी मांग को लेकर 15 अगस्त से गांव-गांव पदयात्रा और जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा था। रविवार की महारैली को आंदोलन की इसी कड़ी के रूप में बताया गया।

सुरक्षा के रहे इंतजाम
महारैली को देखते हुए प्रशासन ने लालकुआं बाजार से तहसील परिसर तक पुलिस बल तैनात किया। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी की गई। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण आंदोलन में मौजूद रहे।

सरकार के आश्वासन के बाद फिलहाल धरना 5 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया गया है। अब आंदोलनकारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय तक अधिसूचना जारी नहीं होने पर तहसील परिसर में दोबारा अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

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