लालकुआं सेंचुरी मिल में बवाल: मजदूरी आधी करने का आरोप, ठेकेदार पर उत्पीड़न और मजदूरों की गेट एंट्री बंद कराने के गंभीर आरोप

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लालकुआं। सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पीएम-4 बंडल सिलाई में कार्यरत श्रमिकों ने मिल प्रबंधन और ठेकेदार ऋषि कुंवर सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए मजदूरी में भारी कटौती, उत्पीड़न और अब गेट एंट्री तक बंद कराने का मामला उठाया है। इससे क्षेत्र में श्रमिकों के बीच आक्रोश तेजी से बढ़ रहा है।

श्रमिकों का कहना है कि वे वर्ष 2007 से लगातार मिल में कार्यरत हैं और बंडल पैकिंग, रील सिलाई व बंडल सिलाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते आ रहे हैं। वर्ष 2008 में जहां उन्हें 72 रुपये प्रति टन मजदूरी मिलती थी, वहीं समय-समय पर हुए समझौतों के बाद यह दर बढ़कर लगभग 229.5 रुपये प्रति टन तक पहुंची थी।

मजदूरों का आरोप है कि अब नए ठेकेदार के माध्यम से काम कराया जा रहा है और मजदूरी दर को घटाकर लगभग 108 रुपये प्रति टन करने का दबाव बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं, विरोध करने पर कई श्रमिकों की मिल में गेट एंट्री भी बंद कर दी गई है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

श्रमिकों ने मिल के प्लांट इंचार्ज सतीश बेले पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके आने के बाद से मजदूरी दर को अधिक बताते हुए लगातार कटौती की बात की जा रही है, साथ ही काम का बोझ भी बढ़ा दिया गया है। श्रमिकों के अनुसार इस माहौल में काम करना मुश्किल हो गया है और इसका असर उनके स्वास्थ्य व पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा है।

बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरी में इतनी बड़ी कटौती को श्रमिकों ने अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
फिलहाल सेंचुरी मिल परिसर में श्रमिकों और प्रबंधन के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और मामला तूल पकड़ता जा रहा है।