लालकुआं: ग्राफिक ऐरा पहुंचे शेफ भूपी, छात्रों को सुनाई संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी
लालकुआं। उत्तराखंड के मशहूर शेफ भूपेंद्र सिंह रावत सोमवार को ग्राफिक ऐरा में आयोजित विशेष कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने छात्रों के साथ अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की। इस दौरान उन्होंने छात्रों को स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजन बनाकर भी सिखाए और जिंदगी में कभी हार न मानने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में शेफ भूपी ने मंडुवा, झंगोरा और अन्य मोटे अनाजों से तैयार व्यंजनों का लाइव कुकिंग डेमोंस्ट्रेशन दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पारंपरिक मोटे अनाज अब वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं, लेकिन आधुनिक जीवनशैली के कारण लोग अपने पारंपरिक खानपान से दूर होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मोटे अनाज केवल स्वाद और पोषण का स्रोत नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली की कुंजी हैं। यदि युवा पीढ़ी स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों को अपनाए, तो उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया में नई पहचान मिल सकती है।
‘शेफ भूपी’ के नाम से देशभर में पहचान बना चुके भूपेंद्र सिंह रावत ने छात्रों को बताया कि उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। खाने और स्वाद के प्रति उनकी रुचि ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि करियर की शुरुआत बेहद कठिन रही, लेकिन लगातार मेहनत और सीखने की चाह ने उन्हें नई पहचान दिलाई।
उन्होंने कहा कि साल 2020 उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। कोरोना लॉकडाउन के दौरान नौकरी छूटने के बाद उन्होंने अपने हुनर को डिजिटल दुनिया तक पहुंचाने का फैसला किया और अपना यूट्यूब चैनल “Chef Bhupi’s Kitchen” शुरू किया।
भूपी ने कहा कि उनका उद्देश्य फाइव स्टार होटल और मशहूर ढाबों का ‘सीक्रेट स्वाद’ आम लोगों की रसोई तक आसान तरीके से पहुंचाना था। उनकी सादगी, पहाड़ी अंदाज और आसान रेसिपी ने लोगों का दिल जीत लिया। आज उनके यूट्यूब चैनल से 26 लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं, जिन्हें वह प्यार से ‘स्वाद के मित्र’ कहते हैं।
ढाबा स्टाइल दाल मखनी, पनीर पेपर फ्राई और रेस्टोरेंट स्टाइल ग्रेवी जैसी उनकी रेसिपी सोशल मीडिया पर खूब पसंद की जाती हैं।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए शेफ भूपी ने कहा, “डिग्री जरूरी है, लेकिन असली दुनिया में आपका हुनर, मेहनत और कभी हार न मानने वाला जज्बा ही आपको सफलता दिलाता है।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और अतिथि मौजूद रहे। अंत में शेफ भूपी को सम्मानित किया गया और पारंपरिक हिमालयी व्यंजनों से सजे विशेष लंच के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


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