बिंदुखत्ता में राजस्व ग्राम की मांग ने पकड़ा जोर, पदयात्रा में आज भी उमड़ा जनसैलाब; हजारों लोग हुए शामिल

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लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर 15 अगस्त से जारी पदयात्रा लगातार विस्तार ले रही है। मंगलवार को पदयात्रा खुरियाखत्ता नंबर 9 और 10 से होते हुए टूटी पुलिया चौराहे पर पहुंची, जहां सभा के बाद पदयात्रा का समापन हुआ। बुधवार को पदयात्रा शीशमभुजिया क्षेत्र के लिए रवाना होगी।

पदयात्रा के दौरान ग्रामीणों को ‘बिंदुखत्ता मांगे राजस्व ग्राम’ लिखी टी-शर्ट वितरित की गईं। वहीं वन अधिकार संगठन के कविराज धामी ने बल्ली सिंह चीमा का प्रसिद्ध जनगीत ‘ले मशालें चल पड़े हैं, लोग मेरे गांव के’ प्रस्तुत किया। जनगीत के दौरान पदयात्रियों में खासा उत्साह देखने को मिला।

नुक्कड़ सभाओं में वनाधिकार कानून पर चर्चा
पदयात्रा के दौरान आयोजित नुक्कड़ सभाओं में ग्रामीणों को वनाधिकार कानून (FRA) के प्रावधानों की जानकारी दी गई। संगठन की महिला उपाध्यक्ष ममता बिष्ट ने कहा कि FRA के तहत तीन पीढ़ियों अथवा 75 वर्ष तक एक ही स्थान पर रहना हर मामले में सार्वभौमिक अनिवार्यता नहीं है।

उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता की बसासत वर्ष 1932 से चली आ रही है और यहां पीढ़ियों से वनाश्रित जीवन के पर्याप्त आधार मौजूद हैं। ऐसे में मामले को केवल ‘संस्तुति’ जैसे शब्दों तक सीमित रखने के बजाय कानून के अनुरूप निर्णय लिया जाना चाहिए।

वनाधिकार संगठन के उपाध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि FRA के तहत राजस्व ग्राम की प्रक्रिया को वन भूमि के अनारक्षण, भूमि के बदले भूमि, प्रतिपूरक वनीकरण या केंद्र सरकार अथवा सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जैसी शर्तों के नाम पर रोकना अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है।

‘जब देश में बन चुके 1700 से अधिक राजस्व ग्राम तो बिंदुखत्ता क्यों नहीं?’
पदयात्रा में शामिल लोगों ने सरकार से सवाल किया कि जब देश में FRA के तहत 1,700 से अधिक राजस्व ग्राम बनाए जा चुके हैं और उत्तर प्रदेश में 54 तथा उत्तराखंड में छह राजस्व ग्राम बनाए गए हैं, तो बिंदुखत्ता को अब तक राजस्व ग्राम का दर्जा क्यों नहीं दिया गया।

संगठन का कहना है कि बिंदुखत्ता के लोग लंबे समय से राजस्व ग्राम के दर्जे की मांग कर रहे हैं और अब इस मांग को लेकर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

आज की पदयात्रा में अध्यक्ष उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ, बलवंत बिष्ट, ममता बिष्ट, कविराज धामी, भरत नेगी, दीपक पाठक, दीपक जोशी, सोहनलाल, सुशील यादव, दीपक नेगी, सूबेदार प्रेम सिंह, मंगल सिंह कोश्यारी, वीरेंद्र कार्की, दीपक पांडे, भाजपा किसान मोर्चा के गोविंद दानू, भाजपा मंडल उपाध्यक्ष कविंद्र कोरंगा, लाल सिंह कोरंगा, वीरेंद्र कार्की, करम सिंह कोरंगा, रमेश गोस्वामी, दौलत सिंह कोरंगा, नवीन जोशी, रज्जी बिष्ट, जे सी उप्रेती, गोविन्द चौहान, गौरव कोरंग, सुन्दर सिंह कोरंगा, बलवन्त सिंह कोरंगा,रमेश कोरंगा, योगेश कोरंगा, मंजू देवी, गंगा देवी, पार्वती देवी, दीपा देवी, कौशल्या देवी,सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।