बिंदुखत्ता: राजस्व गांव मुद्दे पर फिर मिला आश्वासन, धरने के बीच पहुंचे अधिकारी—जानिए क्या कहा
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लालकुआं। बिंदुखत्ता राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब अहम मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले तीन दिनों से जारी क्रमिक अनशन और जनसभा के बीच प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने से पूरे क्षेत्र में हलचल तेज हो गई।

शहीद स्मारक के समीप आयोजित जनसभा में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी, वनाधिकार समिति, पूर्व सैनिक संगठन और राज्य आंदोलनकारी शामिल हुए। इस दौरान सभी ने एक स्वर में बिंदुखत्ता को जल्द से जल्द राजस्व गांव घोषित करने की अधिसूचना जारी करने की मांग उठाई।
आंदोलन को उस समय नया मोड़ मिला जब प्रभागीय वनाधिकारी तराई पूर्वी और अपर जिलाधिकारी नैनीताल मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से सीधा संवाद किया। इस दौरान अधिकारियों ने क्रमिक अनशन पर बैठे लोगों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। साथ ही भरोसा दिलाया कि वनाधिकार कानून (एफआरए) के तहत बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने में हर संभव सहयोग किया जाएगा।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद वनाधिकार समिति ने उनका आभार व्यक्त किया और भविष्य में सकारात्मक सहयोग की उम्मीद जताई। जनसभा में समिति द्वारा अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी भी विस्तार से दी गई।

इस जनआंदोलन में कई प्रमुख लोग और स्थानीय निवासी सक्रिय रूप से शामिल रहे, जिनमें पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल, पूर्व विधायक नवीन चंद्र दुम्का, हरेंद्र बोरा, हेमवती नंदन दुर्गापाल, उमेश भट्ट, बीना जोशी, खिलाफ सिंह दानू, बलवंत बिष्ट, के. प्रताप बिष्ट, नंदन बोरा, दीपक जोशी, दीपक नेगी, ललित कांडपाल, पूरन सिंह परिहार, खीम सिंह कार्की, प्रकाश उत्तराखंडी, विक्की पाठक, पुष्कर दानू, हीरा सिंह बिष्ट, चंद्र सिंह दानू, बलवंत संभल, अर्जुन नाथ गोस्वामी, प्रमोद कॉलोनी, शेखर जोशी, भरत नेगी, भगवान सिंह धामी, बलवंत सिंह, संध्या डालाकोटी, वीरेंद्र दानू, भूतपूर्व सैनिक प्रकाश मिश्रा, अर्जुन बिष्ट (गौलापार), हेमंत बगड़वाल, नंदन बिष्ट समेत सैकड़ों क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
हालांकि आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक राजस्व गांव की अधिसूचना जारी नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।


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