महाशिवरात्रि पर बिंदुखत्ता के श्री हंस प्रेम योग आश्रम में विराट सद्भावना सम्मेलन, सतपाल महाराज ने दिया आस्था, आत्मचिंतन और विश्व शांति का संदेश

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लालकुआं/बिंदुखत्ता। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बिंदुखत्ता स्थित श्री हंस प्रेम योग आश्रम में आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला। विशेष धार्मिक कार्यक्रम और विराट सद्भावना सम्मेलन में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा आश्रम परिसर शिवमय हो उठा और “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज ने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर है। उन्होंने कहा कि सनातन का सार मानव धर्म है, जिसमें सर्वमंगल और विश्व बंधुत्व की भावना निहित है। भगवान शिव त्याग, तपस्या, करुणा और समता के प्रतीक हैं तथा उनका जीवन लोककल्याण और संयम का संदेश देता है।

सतपाल महाराज ने कहा कि शिव परिवार विविधता में एकता का प्रतीक है और समाज को भी इसी समरसता के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अहंकार त्यागकर शिवत्व को अपने जीवन में आत्मसात करें। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में मानव धर्म, सद्भावना और आध्यात्मिक चेतना की अत्यंत आवश्यकता है, जिससे विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त हो सके।

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आश्रम परिसर में भजन-कीर्तन, ध्यान, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना की। पूरा दिन साधना, श्रद्धा और अनुशासन के वातावरण में व्यतीत हुआ।

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इस अवसर पर अमृता माताजी ने शिव और शक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी को सत्य और सद्मार्ग पर चलने का संदेश दिया। महात्मा सत्यबोधानंद जी और हरि संतोषानंद जी ने भी अपने विचार रखते हुए वर्तमान समय में सद्भावना और आध्यात्मिक जागरण की आवश्यकता पर बल दिया।

हजारों श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित यह सम्मेलन बिंदुखत्ता क्षेत्र में आध्यात्मिक एकता और सामाजिक सद्भाव का ऐतिहासिक आयोजन बन गया। महाशिवरात्रि के इस अवसर पर श्री हंस प्रेम योग आश्रम से मानव धर्म, आस्था और विश्व शांति का संदेश दूर-दूर तक प्रसारित हुआ।