उत्तराखंड हाईकोर्ट शिफ्टिंग मामले में बड़ा फैसला, नैनीताल से हल्द्वानी बेलबाबा ले जाने के खिलाफ याचिका खारिज

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने और बिना केंद्र सरकार की अनुमति के भूमि आरक्षित किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुना दिया। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी।

खंडपीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद पूर्व में सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाया। याचिका राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता रमन शाह और अन्य की ओर से दायर की गई थी।

रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन का उठाया था मुद्दा
याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया था कि नैनीताल के जिलाधिकारी द्वारा हाईकोर्ट के नए भवन के निर्माण के लिए बेलबाबा मंदिर के पास रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन का प्रस्ताव तैयार करना वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा-2 का उल्लंघन है।

याचिका में यह भी दावा किया गया था कि प्रस्तावित क्षेत्र हाथी कॉरिडोर के अंतर्गत आता है और वहां बड़े स्तर पर पौधरोपण किया गया है। इसी आधार पर भूमि के इस्तेमाल और हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।

कोर्ट के फैसले से याचिका खारिज
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया। इससे हाईकोर्ट को बेलबाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने से संबंधित प्रक्रिया के खिलाफ दायर इस याचिका को झटका लगा है।

हालांकि, याचिकाकर्ता यदि फैसले से असहमत होते हैं तो सुप्रीम कोर्ट या एनजीटी में मामले को चुनौती देने का विकल्प उनके पास रहेगा।