जमीन बहने के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम? बिन्दुखत्ता में गौला नदी के कटाव पर उठे सवाल

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बिन्दुखत्ता। आखिर ग्रामीणों की कृषि भूमि गौला नदी में समा जाने के बाद ही नेताओं और जिम्मेदार अधिकारियों को नदी के डायवर्जन की याद क्यों आती है? जब नदी का कटाव लगातार बढ़ रहा था, तब समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? आज जब दर्जनों ग्रामीणों की जमीन नदी में समा चुकी है और कई मकानों पर खतरा मंडरा रहा है, तब पोकलैंड मशीन लेकर नदी में उतरने की कवायद शुरू हो गई है।

सवाल यह नहीं है कि अब डायवर्जन का काम क्यों शुरू किया गया। सवाल यह है कि यही काम पहले क्यों नहीं किया गया?

गौला नदी का कटाव कोई अचानक सामने आई समस्या नहीं है। बरसात के मौसम में हर साल नदी का रुख और कटाव ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनता है। इसके बावजूद हर बार समस्या सामने आने के बाद ही प्रशासनिक सक्रियता दिखाई देती है। यदि समय रहते संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर प्रभावी सुरक्षा उपाय किए जाते और नदी के बहाव को नियंत्रित करने की ठोस व्यवस्था होती, तो शायद आज कई किसानों को अपनी जमीन नहीं गंवानी पड़ती।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का मौके पर पहुंचना अच्छी बात है। मशीनें नदी में उतारना भी जरूरी है। लेकिन क्या यह कार्रवाई नुकसान होने से पहले नहीं हो सकती थी?

ग्रामीण वर्षों से स्थायी सुरक्षा दीवार और मजबूत तटबंध की मांग करते रहे हैं। अगर हर साल अस्थायी इंतजाम किए जाते हैं और हर बरसात में वही समस्या फिर खड़ी हो जाती है, तो फिर इस व्यवस्था की समीक्षा कौन करेगा? जनता के सामने यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर हर बार नुकसान होने का इंतजार क्यों किया जाता है?

आज जरूरत केवल गौला नदी का डायवर्जन करने की नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की है। किसानों की जमीन और घरों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट कार्ययोजना बननी चाहिए। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, मजबूत तटबंध, सुरक्षा दीवार और नियमित निगरानी जैसी व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

क्योंकि सवाल सिर्फ मिट्टी के एक टुकड़े का नहीं है। यह उन ग्रामीणों की वर्षों की मेहनत, रोजी-रोटी और आशियाने का सवाल है, जिनकी जमीन धीरे-धीरे गौला नदी में समाती जा रही है।
नेताओं और अधिकारियों का नदी में पोकलैंड लेकर उतरना तस्वीर जरूर बदल सकता है, लेकिन व्यवस्था तभी बदलेगी जब कार्रवाई नुकसान होने के बाद नहीं, बल्कि खतरा दिखाई देते ही शुरू होगी। आखिर यह सिलसिला कब तक चलता रहेगा?

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