बिन्दुखत्ता: गौला नदी के कटाव से किसानों की जमीन नदी में समाई, चार मकान खतरे में; ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन,…VIDEO
लालकुआं। बिंदुखत्ता के इन्द्रानगर द्वितीय गब्दा क्षेत्र में गौला नदी का कटाव लगातार गंभीर होता जा रहा है। नदी के तेज बहाव और कटाव की चपेट में आकर तीन दर्जन से अधिक किसानों की कई एकड़ जमीन कटने के बाद गौला नदी में समा चुकी है। वहीं क्षेत्र के कई मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। इनमें चार मकान ऐसे हैं, जिनके दरवाजों तक गौला नदी का कटाव पहुंच चुका है और उनके किसी भी समय ध्वस्त होने की आशंका बनी हुई है।
इसके अलावा कई अन्य मकान भी गौला नदी के कटाव की जद में हैं। इन मकानों के आसपास की जमीन का कटाव हो चुका है और जमीन का हिस्सा कटकर गौला नदी में समा चुका है। नदी का कटाव लगातार जारी रहने से प्रभावित परिवारों में दहशत का माहौल है।
वन विभाग ने पोकलैंड मशीन रोकी तो भड़का आक्रोश
गौला नदी के डायवर्सन के लिए गुरुवार को स्थानीय विधायक और एसडीएम ने मौके का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद गौला नदी के बहाव को डायवर्ट करने के लिए पोकलैंड मशीन उतारकर कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए थे।
इसके बाद शुक्रवार सुबह पोकलैंड मशीन गौला नदी में पहुंची, लेकिन वन विभाग के कर्मचारियों ने मशीन को मौके पर ही रुकवा दिया। मशीन रोके जाने की सूचना मिलते ही ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा। महिला, पुरुष और बच्चों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और उन्होंने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की।
करीब आठ घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद प्रशासन के निर्देशन में पोकलैंड मशीन से गौला नदी के डायवर्सन का कार्य दोबारा शुरू कराया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि गौला नदी का कटाव हर वर्ष उनकी जमीन और मकानों के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। अब तक कई एकड़ जमीन कटकर नदी में समा चुकी है और दर्जनों लोग अपनी जमीन गंवाने के बाद बेघर हो चुके हैं। इस बार भी हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि हर वर्ष नदी किनारे तटबंध बनाए जाते हैं, लेकिन कथित भ्रष्टाचार के कारण बरसात का मौसम शुरू होते ही तटबंध गौला नदी में समा जाते हैं। ग्रामीणों ने स्थायी सुरक्षा दीवार बनाए जाने की मांग को लेकर लंबे समय से शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिए जाने की बात कही है।
ग्रामीणों के अनुसार प्रकाश, सुरेश, रमेश, टोनी, हरीश पांडे, ललित, सतीश, नीमा देवी, पंकज, शिवदत्त नैनवाल, जगदीश, दीपक, कंचन मोरा, राजेंद्र और हंसा जोशी समेत कई ग्रामीणों के मकान गौला नदी के कटाव की जद में हैं। इन परिवारों के मकानों के आसपास की जमीन कट चुकी है और कटाव के कारण जमीन का हिस्सा गौला नदी में समा चुका है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कटाव रोकने के साथ ही स्थायी सुरक्षा दीवार और मजबूत तटबंध का निर्माण कराने की मांग की है। फिलहाल गौला नदी का भू-कटाव लगातार जारी रहने से इन्द्रानगर द्वितीय के ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है। फिलहाल ग्रामीणों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और गोला नदी डायवर्सन के लिए पोकलैंड मशीनों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।

संपादक – उत्तराखण्ड उदय
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