(बड़ी खबर) उत्तराखंड: कांवड़ियों के भंडारे में हाथियों का हमला, ट्रॉलियां पलट दीं, मच गई भगदड़…

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डोईवाला/देहरादून। कांवड़ यात्रा के दौरान देहरादून-हरिद्वार मार्ग पर स्थित लच्छीवाला रेंज में मणि माई मंदिर के पास उस वक्त हड़कंप मच गया जब हाथियों का एक दल अचानक भंडारे के पास पहुंच गया। शनिवार रात करीब 8:30 बजे नर-मादा हाथी अपने शिशु के साथ जंगल से सड़क पार करने निकले थे, लेकिन तेज साउंड सिस्टम और कांवड़ियों की भीड़ के शोर से हाथी बुरी तरह बौखला गए। गुस्साए हाथियों ने मौके पर खड़ी दो ट्रॉलियों को पलट दिया, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

गनीमत रही कि हाथी भंडारे के पंडाल के भीतर नहीं घुसे, अन्यथा सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती थी। घटना की सूचना पर तत्काल वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पंडाल को खाली करवाया गया। विभाग की टीम ने बम-पटाखे बजाकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा और रातभर गश्त की। पुलिस ने भी तत्काल मौके पर पहुंचकर ट्रैफिक को नियंत्रित किया और सड़क पर जाम न लगे, इसका प्रबंध किया।

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह इलाका हाथी कॉरिडोर के अंतर्गत आता है, जहां से हाथी नियमित रूप से जंगल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से की ओर निकलते हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कांवड़ियों द्वारा तेज आवाज में साउंड सिस्टम बजाना और हाथियों के पास जाकर वीडियो बनाना वन्यजीवों के व्यवहार को भड़का सकता है, जिससे बड़ी घटनाएं हो सकती हैं। शनिवार रात हुई यह घटना इसी लापरवाही का नतीजा थी।

लच्छीवाला टोल प्लाजा के सुपरवाइजर राकेश नौटियाल और अरुण ने बताया कि यदि समय रहते हाथी वन क्षेत्र में नहीं लौटते और पंडाल में घुस जाते, तो सैकड़ों लोगों की जान पर बन आती। वन विभाग ने यात्रियों से अपील की है कि वन क्षेत्र में रुकने से बचें और साउंड सिस्टम का उपयोग न करें ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्ते में कोई व्यवधान न आए।
यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी देती है कि कांवड़ यात्रा जैसे आयोजनों के दौरान वन क्षेत्रों में संयम और सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। वन्यजीवों की शांति भंग करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह श्रद्धालुओं की जान के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।