ट्रीज़ फॉर इकोटूरिज्म™ परियोजना एक हरित उत्तराखंड की दिशा में एक महान कदम

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पहले से ही 2,50,000 से अधिक स्थानीय पेड़ लगा दिये गये हैं, ताकि जलवायु परिवर्तन, विकासात्मक गतिविधियों और बड़े पैमाने पर पर्यटन के प्रभाव का सामना किया जा सके

भारत में जलवायु विज्ञानी जलवायु परिवर्तन के लिए मौसम की बढ़ती विसंगतियों और अनियमित मानसून पैटर्न जिसमें बारिश की कमी और अचानक बाढ़ से लेकर जलवायु परिवर्तन तक को शामिल किया गया है। जैव विविधता, जीवन और आजीविका को खतरे में डालने वाली बिगड़ती स्थितियों को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की जरूरत है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हाल ही में हुई आपदाओं ने जलवायु परिवर्तन, विकास और पर्यटन के प्रभावों के खिलाफ पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों को मजबूत करने की अत्यावश्यकता को हाइलाइट किया हैं।

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अगस्त, 2023 में, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को सिमली से ग्वालदम तक सड़क निर्माण के दौरान काटे गए सैकड़ों पेड़ों की भरपाई करने के लिए उत्तराखंड में एक महीने के भीतर कम से कम 10,000 पेड़ लगाने के लिए निर्देशित किया है। हालाँकि, सामाजिक उद्यम Grow-Trees.com पहले से ही ‘ट्रीज़ फॉर इकोटूरिज्म™’ परियोजना के माध्यम से राज्य के हरित कवर को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। वर्तमान में यह नौगांव ब्लॉक, बड़कोट तहसील और उत्तरकाशी के तियान, देवलसारी, कंडारी, सुनारा, लोधन गांवों में वनीकरण गतिविधियों में सक्रिय रूप से लगा हुआ है।

Grow-Trees.com के सह-संस्थापक प्रदीप शाह ने कहा, “जलवायु परिवर्तन को अलग से संबोधित नहीं किया जा सकता क्योंकि यह केवल एक पर्यावरण समस्या नहीं है, बल्कि मानव पर इसके गहरे प्रभाव भी हैं। बारकोट में, हम न केवल पारिस्थितिक घाटे को दूर करने की दिशा में काम कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय आबादी का समर्थन भी कर रहे हैं, जिसमें वंचित महिलाओं के लिए जीविका के अवसर शामिल हैं।

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इस परियोजना का उद्देश्य यह दिखाना है कि जब पर्यावरण और पर्यटन के बीच संतुलन स्थापित होता है, तो दोनों साथ-साथ विकसित हो सकते हैं और परियोजना का लक्ष्य लगभग 4,75,000 पेड़ लगाने का है, जिसमें से 2,50,000 से अधिक स्थानीय पेड़ पहले ही लगा दिए गए हैं, ताकि राज्य की पारिस्थितिकीय संरचना की अखंडता की रक्षा की जा सके। उत्तराखंड में इस तरह के परियोजनाएं, हरित आवरण की अभूतपूर्व क्षति होने के समय में बहुत ही आवश्यक हैं।

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