चंपावत गैंगरेप केस में बड़ा खुलासा: पुलिस बोली- विरोधियों को फंसाने के लिए रची गई थी साजिश

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चंपावत। उत्तराखंड के चर्चित नाबालिग गैंगरेप मामले में गुरुवार को बड़ा मोड़ सामने आया है। चंपावत पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद दावा किया है कि मामला आपसी रंजिश के चलते विरोधियों को फंसाने के लिए रची गई सुनियोजित साजिश हो सकता है।

चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने देर शाम प्रेसवार्ता कर बताया कि बुधवार को एक व्यक्ति ने कोतवाली चंपावत में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी 16 वर्षीय बेटी के साथ तीन लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तत्काल पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस क्षेत्राधिकारी की निगरानी में 10 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर फॉरेंसिक जांच कराई, पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया और उसके बयान भी दर्ज किए गए।

जांच के दौरान पुलिस को कई अहम तथ्य मिले। पुलिस के अनुसार, नाबालिग घटना वाले दिन अपनी इच्छा से एक शादी समारोह में शामिल होने गई थी। सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से उसकी विभिन्न स्थानों पर मौजूदगी और गतिविधियों की पुष्टि हुई।

एसपी ने बताया कि मेडिकल जांच में किसी प्रकार की बाहरी या अंदरूनी चोट, संघर्ष या जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। साथ ही कुछ गवाहों के बयान तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल नहीं खाए।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कथित मुख्य साजिशकर्ता कमल रावत, पीड़िता और उसकी महिला मित्र के बीच घटना वाले दिन कई बार बातचीत और संपर्क हुआ था। पुलिस का दावा है कि पूरा घटनाक्रम एक पूर्व नियोजित षड्यंत्र की ओर संकेत करता है।

पुलिस के मुताबिक नामजद आरोपी विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे। तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से उनकी गैरमौजूदगी की पुष्टि हुई है।

एसपी रेखा यादव ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को प्रताड़ित न होना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में आरोप झूठे या भ्रामक पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।