उत्तराखंड: भारी बारिश की चेतावनी के बाद 5 जिलों में स्कूल बंद, 10 जुलाई को कक्षा 1 से 12 तक छुट्टी; आंगनबाड़ी केंद्र भी रहेंगे बंद
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की बारिश के बीच मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत और पौड़ी गढ़वाल जिलों में 10 जुलाई को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, अशासकीय एवं निजी विद्यालयों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिवसीय अवकाश घोषित किया गया है।
मौसम विभाग ने 9 और 10 जुलाई को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। लगातार बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और सड़कों के बाधित होने का खतरा बना हुआ है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा होने की आशंका जताई गई है।
इन 5 जिलों में स्कूल रहेंगे बंद
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत और पौड़ी गढ़वाल जिला प्रशासन ने 10 जुलाई को स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने का निर्णय लिया है।
जिला प्रशासन की ओर से संबंधित शिक्षा अधिकारियों, विद्यालय प्रबंधन और आंगनबाड़ी केंद्रों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
भारी बारिश से बढ़ा भूस्खलन और बाढ़ का खतरा
प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। पर्वतीय मार्गों पर मलबा और भूस्खलन आने से यातायात बाधित होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं नदी-नालों और गधेरों का जलस्तर बढ़ने से निचले और संवेदनशील क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है।
मौसम विभाग ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, उफनते नदी-नालों के पास न जाने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी एजेंसियों को किया अलर्ट
मौसम की चेतावनी को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित विभागों और जल विद्युत परियोजनाओं को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने अधिकारियों को मानसून के दौरान बेहतर समन्वय बनाए रखने और राज्य के प्रमुख बांधों एवं बैराजों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
बांधों से पानी छोड़ने से पहले देनी होगी सूचना
आपदा प्रबंधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बांध या बैराज से पानी छोड़े जाने से पहले राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और संबंधित जिला प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य होगा।
सूचना में यह भी बताना होगा कि छोड़ा गया पानी कितने समय में किन क्षेत्रों तक पहुंचेगा, डाउनस्ट्रीम इलाकों में जलस्तर कितना बढ़ सकता है और उसका संभावित प्रभाव क्या होगा।
प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने, नदी-नालों एवं भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने और बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करने की अपील की है।


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