टनकपुर में सीएम धामी ने 19 करोड़ की योजनाओं का किया शिलान्यास, कहा— सीमांत क्षेत्रों का तेजी से होगा सर्वांगीण विकास

ख़बर शेयर करें 👉

टनकपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को टनकपुर पहुंचकर 19.06 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं में सुधार होगा और पर्यटन व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

सीएम धामी ने टनकपुर में विकास कार्यों की आधारशिला रखने के बाद बनबसा में 1.43 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सैनिक स्मारक, बहुउद्देशीय भवन और एसएसबी चौकी का शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा कि यह स्मारक उत्तराखंड के वीर सैनिकों की शौर्यगाथा और बलिदान का प्रतीक बनेगा तथा युवाओं में देशभक्ति की भावना को और प्रबल करेगा।

मुख्यमंत्री ने चम्पावत में 9.87 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली मल्टीलेवल कार पार्किंग और 3.52 करोड़ रुपये की लागत से कॉम्प्लेक्स निर्माण कार्य का भी शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से स्थानीय व्यापारियों व पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

इसके साथ ही सीएम धामी ने धार्मिक और पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं की भी नींव रखी। इनमें 61.41 लाख रुपये से मल्लाड़ेश्वर मंदिर, 85.72 लाख रुपये से भागेश्वर मंदिर, 47.03 लाख रुपये से झालीमाली मंदिर और 90.11 लाख रुपये से ताड़केश्वर मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्य शामिल हैं।

इसके अलावा 89.26 लाख रुपये से मानेश्वर मंदिर में पर्यटन अवस्थापना विकास, 97.52 लाख रुपये से डिप्टेश्वर मंदिर के सौंदर्यीकरण और 96.96 लाख रुपये से लोहाघाट स्थित एबट माउंट के ब्रिटिशकालीन चर्च व सिमिट्री के संरक्षण कार्य का भी शिलान्यास किया गया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इन परियोजनाओं से चम्पावत और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरे किए जाएं ताकि जनता जल्द इनका लाभ उठा सके।

सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार विकास, संस्कृति और पर्यटन के संतुलित समन्वय पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सीमांत जिलों को केवल भौगोलिक दृष्टि से नहीं बल्कि विकास और समृद्धि के प्रतीक के रूप में स्थापित करना है।