बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग तेज़: खुली बैठक में पारित हुआ सर्वसम्मत प्रस्ताव
लालकुआं(बिंदुखत्ता)। लंबे समय से राजस्व ग्राम की मांग कर रहे बिंदुखत्ता के ग्रामीणों ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। रविवार को इन्द्रानगर द्वितीय बिंदुखत्ता में वन अधिकार समिति की खुली बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता वनाधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी ने की। इस दौरान दो अहम प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए — एक बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग से जुड़ा था, जबकि दूसरा गौला नदी से हो रहे भू-कटाव पर चिंता व्यक्त करने वाला था।

बैठक में वन अधिकार समिति के सदस्यों ने बताया कि उत्तराखंड शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 25 सितंबर 2025 को हुई उच्च स्तरीय बैठक में बिंदुखत्ता क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित करने पर गंभीर विचार हुआ था। शासन ने इस विषय में वनाधिकार अधिनियम 2006 और भारत सरकार के जनजातीय मंत्रालय की गाइडलाइन्स के तहत जिला स्तरीय वनाधिकार समिति को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया है।
ग्रामीणों ने इस आधार पर निर्णय लिया कि एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी नैनीताल से मिलकर शासन की अधिसूचना जारी करवाने का अनुरोध करेगा। साथ ही यह भी तय हुआ कि राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती (9 नवंबर 2025) से पहले अधिसूचना जारी कराने के लिए विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी समर्थन मांगा जाएगा।
बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि बिंदुखत्ता का राजस्व ग्राम घोषित होना यहां के विकास और अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा। उनका कहना था कि वर्षों से यह क्षेत्र प्रशासनिक रूप से उपेक्षित रहा है और राजस्व ग्राम बनने से भू-अधिकार, शिक्षा, सड़क, सिंचाई और आवासीय योजनाओं को लाभ मिलेगा।
दूसरे प्रस्ताव में गौला नदी से होने वाले भू-कटाव और किसानों की लगातार हो रही हानि पर चर्चा की गई। ग्रामीणों ने कहा कि बरसात के मौसम में खेत और मकान नदी में समा जाते हैं, लेकिन सरकार की ओर से राहत या स्थायी समाधान नहीं मिल पा रहा। इस पर प्रस्ताव रखा गया कि आगामी बरसात से पहले मजबूत तटबंधों का निर्माण कराया जाए ताकि खेती और बस्तियां सुरक्षित रह सकें।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि गौला नदी से प्राप्त खनन न्यास निधि को केवल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए उपयोग किया जाए — जैसे भू-कटाव रोकथाम, शिक्षा, शौचालय, सिंचाई, सड़क और पेयजल योजनाएं। इसके अलावा जिन किसानों की भूमि नदी में समा चुकी है, उनकी जमीन पर वनाधिकार कानून के तहत वृक्षारोपण का अधिकार स्थानीय लोगों को दिया जाए।
बैठक में वनाधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुननाथ गोस्वामी, उमेश भट्ट, भुवन भट्ट, बालम सिंह बिष्ट, श्याम सिंह, दिनेश पलड़िया, शंकर गोस्वामी, बहादूर सिंह, राजेन्द्र सिह, दौलत नाथ, बलवंत सिंह बिष्ट, किशन सिंह समेत कई ग्रामीणों ने अपने सुझाव दिए और एक स्वर में कहा कि बिंदुखत्ता के लोगों को अब उनके हक का अधिकार मिलना ही चाहिए।
इस दौरान भरी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


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