बिंदुखत्ता राजस्व गांव पर फिर अड़ंगा! वनाधिकार समिति बोली—सभी दस्तावेज पूरे, दो साल बाद आपत्ति जनता के साथ अन्याय

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लालकुआं। वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया एक बार फिर रुक गई है। जिला स्तरीय वनाधिकार समिति की बैठक में उपखंड स्तरीय समिति द्वारा भेजे गए सामूहिक दावे पर तीन बिंदुओं में आपत्ति जताते हुए रिपोर्ट वापस भेज दी गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है, क्योंकि ग्रामीणों का कहना है कि सभी जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य पहले ही अधिनियम के अनुसार जमा किए जा चुके हैं।

बिंदुखत्ता वनाधिकार समिति के सचिव भुवन भट्ट ने बताया कि ग्रामीणों ने सामूहिक दावा सभी नियमों और प्रमाणों के साथ प्रस्तुत किया था। वर्ष 2024 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस प्रस्ताव को अनुमोदित कर शासन को भी भेज दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि दो साल तक प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित रहा और अब अचानक तीन बिंदुओं पर आपत्ति उठाकर रिपोर्ट लौटाना बिंदुखत्ता की हजारों की आबादी के साथ अन्याय है।

ग्रामीणों के अनुसार दावे में पात्रता, प्रभावित जनसंख्या, पारंपरिक वनवासियों का विवरण और आवश्यक दस्तावेज स्पष्ट रूप से संलग्न किए गए थे। सामूहिक दावे पर 15 हस्ताक्षर होने की आपत्ति पर समिति ने कहा कि यह सामूहिक दावा पूरे क्षेत्र की सहमति से प्रस्तुत किया गया था, न कि केवल कुछ लोगों की ओर से। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में 40 हजार से अधिक जनसंख्या और 11 हजार से ज्यादा परिवार बसे हैं, जो दशकों से जमीन, खेती और आवागमन के लिए इन्हीं क्षेत्रों पर निर्भर हैं।

वनाधिकार समिति ने साफ कहा कि सामूहिक दावे को अधिनियम के अनुरूप ही दोबारा भेजने की बात कही जा रही है, जबकि सभी प्रक्रियाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने में अनावश्यक देरी की जा रही है और राजनीतिक कारणों से बिंदुखत्ता का मामला बार-बार रोका जा रहा है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि दावों की दोबारा जांच के नाम पर प्रक्रिया को लंबा न किया जाए और बिंदुखत्ता को जल्द से जल्द राजस्व ग्राम घोषित कर न्याय दिया जाए।

बैठक में डीएफओ तराई पूर्वी हिमांशु बागरी, एडीएम शैलेन्द्र नेगी, एसडीएम राहुल शाह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने साफ कहा कि यदि रिपोर्ट को अनावश्यक रूप से रोका गया तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।