बिंदुखत्ता राजस्व गांव बनने का खुला रास्ता; उत्तराखंड में वन भूमि पर बसे गांवों को राजस्व गांव घोषित करने की प्रक्रिया आरंभ

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लालकुआं। प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में अपनाई गई प्रक्रिया को आधार बनाते हुए उत्तराखंड में भी वन भूमि पर बसे गांवों को राजस्व गांव घोषित करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।

बतादें कि दिनांक 25 अक्टूबर, 2023 को महामहिम राज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार उत्तराखंड में रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत तीन गांवों—लेटी, चोपड़ा और रामपुर को राजस्व गांव बना दिया गया है। यह शासनादेश वन अधिकार अधिनियम 2006 की अगली कड़ी का रूप है। इस क्षेत्र मे वर्ष 1980 के बाद पहली बार किसी वन भूमि पर स्थित गांव को राजस्व का दर्जा दिया गया है जो कि वास्तव में एक ऐतिहासिक फैसला होने के साथ-साथ बिंदुखत्ता के लिए भी राजस्व ग्राम का रास्ता खोलने वाला कदम है। विदित हो कि माननीय विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट जी के नेतृत्व में बिंदुखत्तावासी भी उक्त अधिनियम की उसी प्रक्रिया को अपना रहे हैं जिसका पालन रामनगर के उक्त तीन गांववासियों द्वारा किया गया।

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उल्लेखनीय है कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में 2 वर्ष पूर्व ही टोंगिया गांवों को राजस्व गांव घोषित कर दिया गया था परंतु उत्तराखड में यह प्रक्रिया पहले कभी नहीं अपनाई गई। अब इस आदेश के पारित होने के पश्चात उत्तराखंड में वन भूमि पर बसे हुए सैकड़ों वनगांव, डेरे और बस्तियों सहित बिंदुखत्ता के भी राजस्व गांव बनने का रास्ता खुल गया है।

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इस अधिसूचना के जारी होने पर वनाधिकार समिति बिंदुखत्ता इन गांवों की संघर्षशील जनता को बधाई देते हुए मा. मुख्यमंत्री, मा. सांसद, मा. विधायक सहित राज्य सरकार का हार्दिक धन्यवाद करती है तथा उम्मीद करती है कि बिन्दुखत्तावासियों को भी उनकी चिर-प्रतीक्षित आशा के अनुरूप इसी तरह इस अधिनियम का लाभ प्राप्त होगा, जिसके लिए यहां की ग्राम वन अधिकार समिति पुरजोर कोशिश कर रही है।