बिंदुखत्ता राजस्व गांव की मांग ने लिया जन आंदोलन का रूप, ‘चाय पर चर्चा’ से उठा हुंकार, हजारों ग्रामीणों ने किया आर-पार का ऐलान
लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की लंबे समय से चली आ रही मांग ने अब निर्णायक जन आंदोलन का रूप ले लिया है। शुक्रवार को बिंदुखत्ता वनाधिकार समिति के आह्वान पर लालकुआं तहसील परिसर में आयोजित एकदिवसीय धरना प्रदर्शन में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। ‘चाय पर चर्चा’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं, पूर्व सैनिकों और सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर सरकार से तत्काल अधिसूचना जारी करने की मांग की।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि बिंदुखत्ता को अब तक राजस्व गांव घोषित न किया जाना वन अधिकार अधिनियम 2006 की भावना और प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य बने 25 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बिंदुखत्ता को आरक्षित वन क्षेत्र के दायरे में रखकर हजारों परिवारों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
प्रदर्शन की सबसे अहम तस्वीर यह रही कि राजनीतिक दलों से जुड़े लोग, पूर्व सैनिक संगठन, सामाजिक संस्थाएं और वनाधिकार समिति के प्रतिनिधि एक ही मंच पर दिखाई दिए। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य, जमीन और स्थायी अधिकारों की लड़ाई है।
धरने में यह सवाल भी प्रमुखता से उठा कि जब पूर्व में जिलाधिकारी स्तर से पूरी पत्रावली शासन को भेजी जा चुकी थी, तो फिर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय उसे दोबारा निचले स्तर पर क्यों रोका गया। वक्ताओं ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम की धारा 4(7) में वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने का स्पष्ट प्रावधान है, लेकिन उत्तराखंड में अब तक गिने-चुने गांवों को ही इसका लाभ मिल पाया है।
धरना स्थल सरकार विरोधी नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन सीमित नहीं रहेगा और नैनीताल से लेकर देहरादून तक सड़कों पर उतरेगा। वक्ताओं ने कहा कि दशकों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, अब ठोस फैसला चाहिए।
कार्यक्रम में महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने आंदोलन को नई धार दी। मातृशक्ति ने साफ शब्दों में कहा कि बिंदुखत्ता की लड़ाई अब घर-घर की लड़ाई बन चुकी है और वे अपने अधिकारों के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगी।
वनाधिकार समिति ने ऐलान किया कि आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर संवाद, अन्य राज्यों की समितियों से समर्थन और बड़े जन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कहा कि अब संघर्ष का रास्ता पीछे नहीं हटेगा और राजस्व गांव का दर्जा मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।


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