NEET में अच्छे स्कोर के बाद भी खतरे में MBBS एडमिशन! उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों पर CM धामी ने दिए जांच के आदेश

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देहरादून। उत्तराखंड में NEET UG काउंसलिंग के पहले राउंड में हुए कुछ MBBS दाखिलों को लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब सिर्फ स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे तक सीमित जांच के बजाय सभी आरक्षित श्रेणियों में जमा किए गए दस्तावेजों के सत्यापन के निर्देश दिए हैं।

मामला सामने आने के बाद अब उन अभ्यर्थियों के दाखिले भी जांच के दायरे में आ गए हैं, जिन्होंने आरक्षित श्रेणी के दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल सीट हासिल की है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आठ अभ्यर्थियों की पहचान किए जाने की बात सामने आई है। संबंधित प्रमाणपत्र निरस्त किए जाने के साथ उनके दाखिले भी रद्द किए गए हैं।

NEET स्कोर अच्छा होने के बावजूद रद्द हो सकता है दाखिला
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि दस्तावेजों की जांच के दौरान यदि किसी अभ्यर्थी का प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है, तो उसे निरस्त किया जाएगा और दाखिले पर भी कार्रवाई होगी। यानी NEET में प्राप्त अंक अच्छे होने के बावजूद आरक्षण का लाभ लेने के लिए लगाए गए दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर प्रवेश रद्द हो सकता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि कथित फर्जी दस्तावेज किस तरह जारी हुए और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। यदि किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आगे और सख्त होगा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
सरकार ने भविष्य की मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून के जिलाधिकारी को मामले की जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।

उत्तराखंड में NEET UG काउंसलिंग के पहले राउंड की प्रक्रिया 13 अगस्त से 5 सितंबर 2026 तक चली थी। इसके बाद दूसरे राउंड की प्रक्रिया शुरू हुई और कॉलेज रिपोर्टिंग की अंतिम तारीख 19 सितंबर थी। अब खाली रहने वाली सीटों के आधार पर आगे मॉप-अप राउंड आयोजित किया जाएगा।

फिलहाल पहले से दाखिला ले चुके अभ्यर्थियों के आरक्षित श्रेणी से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन पर सरकार की नजर है।