“ईजा की माटी”, संदीप सोनु का नया गीत हुआ रिलीज,…..गीत से गूंजी पहाड़ की पुकार

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उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार हो रहे पलायन ने न केवल गांवों को वीरान किया है, बल्कि पहाड़ की संस्कृति, परंपरा और विरासत को भी संकट में डाल दिया है। सुविधाओं की कमी, रोजगार के अवसरों की दुर्लभता और जीवन की कठिनाइयों के चलते लोग पहाड़ छोड़ने को मजबूर हैं। ऐसे समय में कुछ लोक कलाकार अपने गीतों के जरिए पहाड़ की माटी से जुड़ाव बनाए रखने और संस्कृति को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

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इन्हीं प्रयासों की कड़ी में लोकगायक संदीप सोनु का नया गीत “ईजा की माटी” आज उनके यूट्यूब चैनल Sandeep Sonu पर रिलीज हो गया है। गीत में पहाड़ को छोड़कर जा रहे युवाओं से अपने गांव लौटने और अपनी जड़ों से नाता बनाए रखने का मार्मिक आह्वान किया गया है।

विगत कुछ वर्षों से पहाड़ के लोग पलायन करने पर मजबूर हैं इसका एक कारण पहाड़ में सुविधाओं की कमी होना भी है! पहाड़ की संस्कृति को बचाने के लिए कुमाऊं लोग गायक लगातार अपने गीत निकाल रहे हैं उन्हीं लोग गायको में से एक हैं संदीप सोनु जो लगातार अपने गीतों के माध्यम से पहाड़ की संस्कृति एवं विरासत को बचाने का कार्य कर रहे हैं!
पूर्व में भी उनके अनेकों गीतों ने दर्शकों को अपने और आकर्षित किया है जिसमे मोंटी चाचा, ओ रंगीली धना, फवा बागा रे, बैठ बाना मेरी गाड़ी मा, सुवा प्रतापा जैसे गीत शामिल है।

आज उनका एक गीत “ईजा की माटी” जो कि संदीप सोनु यूट्यूब चैनल पर रिलीज हुआ है! इस गीत मे मुख्य शीर्षक अपने पहाड़ को ना छोड़कर जाने की, पहाड़ लौटकर आने की आग्रह किया है। आज का युवा ना सिर्फ पहाड़ छोड़कर जा रहा है साथ अपनी संस्कृति को भी भूलता हुआ नजर आ रहा है! आप भी गीत को जरूर सुने! इसके सिंगर संदीप सोनु स्वयं है! लिरिक्स हेमंत बिष्ट जी ने लिखे हैं, म्यूजिक ललित गित्यार का है।