शक, गुस्सा और सात फेरों का खूनी अंत… पिथौरागढ़ में 10 महीने में 3 पत्नियों की हत्या से दहशत

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उत्तराखंड के शांत माने जाने वाले सीमांत जिले पिथौरागढ़ में पति-पत्नी के रिश्ते लगातार खौफनाक मोड़ लेते जा रहे हैं। सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाने वाले दंपति अब मामूली विवाद, शक और गुस्से में एक-दूसरे की जान लेने पर उतारू हो रहे हैं। बीते 10 महीनों में जिले में पति-पत्नी के बीच हत्या की तीन सनसनीखेज वारदातें सामने आने से पूरे इलाके में डर और चिंता का माहौल गहरा गया है।

एक साल से भी कम समय में सामने आए इन तीन हत्याकांडों ने पहाड़ के शांत समाज को झकझोर कर रख दिया है। रिश्तों में बढ़ती दूरियां और घरेलू विवाद अब खूनी संघर्ष का रूप लेने लगे हैं।

29 जुलाई 2025 को नेपाल सीमा से लगे झूलाघाट क्षेत्र के कानड़ी गांव में पहली सनसनीखेज घटना सामने आई थी। यहां गणेश चंद ने अपनी पत्नी कमला देवी की धारदार हथियार से हत्या कर दी थी। इस वारदात के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी।

दूसरी घटना 24 जनवरी को पिथौरागढ़ नगर के जाखनी स्थित पवन विहार कॉलोनी में हुई। यहां किराए के मकान में रहने वाले राजेंद्र राम लाबड़ उर्फ राजेश ने गुस्से में अपनी पत्नी नीलम देवी की हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी खुद कोतवाली पहुंच गया और पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

तीसरी वारदात 29 अप्रैल को अस्कोट क्षेत्र के द्वालीसेरा गांव में हुई। यहां भुवन प्रसाद ने कुल्हाड़ी से हमला कर अपनी पत्नी गीता देवी की जान ले ली। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया है।

समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, सोशल मीडिया का बढ़ता असर और पति-पत्नी के बीच खत्म होता संवाद रिश्तों में दरार पैदा कर रहा है। आभासी दुनिया में बढ़ती व्यस्तता के कारण भरोसा कमजोर हो रहा है और शक की दीवारें खड़ी हो रही हैं। इसके अलावा नशे की लत, आर्थिक दबाव और पारिवारिक तनाव भी घरेलू हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पहाड़ का शांत समाज किस दिशा में जा रहा है और रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट को रोकने के लिए समाज और परिवारों को अब गंभीर पहल करने की जरूरत है।